इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में आग क्यों लगती है? जानें मुख्य कारण और सुरक्षा के जरूरी नियम

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs)—विशेषकर टू-व्हीलर्स की लोकप्रियता बहुत तेजी से बढ़ी है। कम रनिंग कॉस्ट और पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण लोग इन्हें तेजी से अपना रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ समय में गर्मियों के दौरान इलेक्ट्रिक स्कूटरों और कारों में अचानक आग लगने (EV Fire Incidents) की कई घटनाओं ने ग्राहकों के मन में डर और संशय पैदा कर दिया है।

गाड़ी में अचानक आग लगना न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाता है, बल्कि जानलेवा भी हो सकता है। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि आखिर सुरक्षित मानी जाने वाली इन आधुनिक गाड़ियों में आग क्यों लगती है और थोड़ी सी सतर्कता बरतकर इस तरह के हादसों से कैसे बचा जा सकता है।


आग लगने का मुख्य वैज्ञानिक कारण: “थर्मल रनअवे” (Thermal Runaway)

इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन (Lithium-ion) बैटरी ऊर्जा से भरपूर (High Energy Density) होती हैं। जब बैटरी के किसी एक सेल में अत्यधिक गर्मी या आंतरिक शॉर्ट सर्किट की वजह से तापमान अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगता है, तो इस प्रक्रिया को विज्ञान की भाषा में ‘थर्मल रनअवे’ (Thermal Runaway) कहा जाता है।

थर्मल रनअवे के दौरान बैटरी सेल के अंदर रासायनिक प्रतिक्रिया तेजी से होती है, जिससे अत्यधिक ऑक्सीजन और ज्वलनशील गैसें निकलती हैं। यह आग एक सेल से दूसरे सेल में चेन रिएक्शन की तरह फैलती है, जिसे पारंपरिक पानी या सामान्य अग्निशामक (Fire Extinguisher) से बुझाना काफी मुश्किल होता है।


इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने के 5 प्रमुख कारण

गाड़ी में आग लगने के पीछे केवल एक वजह नहीं होती, बल्कि इसके पीछे कई तकनीकी और पर्यावरणीय कारक जिम्मेदार होते हैं:

1. खराब क्वालिटी का बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (Faulty BMS)

बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) को बैटरी का ‘दिमाग’ कहा जाता है। इसका काम बैटरी के वोल्टेज, करंट और तापमान की निगरानी करना है। यदि BMS घटिया क्वालिटी का हो या फेल हो जाए, तो वह बैटरी के ओवरहीट होने पर बिजली की सप्लाई नहीं काट पाता, जिससे आग लग जाती है।

2. मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट और घटिया क्वालिटी के सेल्स

कुछ कंपनियाँ लागत कम करने के लिए निम्न स्तर के बैटरी सेल्स का इस्तेमाल करती हैं। सेल्स की पैकेजिंग में खामी या उनके बीच इंसुलेशन (Insulation) की कमी होने पर बैटरी के अंदर आंतरिक शॉर्ट सर्किट (Internal Short Circuit) हो जाता है।

3. अत्यधिक तापमान और मौसम की मार

भारत में गर्मियों के दौरान तापमान 45°C से 48°C तक पहुँच जाता है। लिथियम-आयन बैटरी आमतौर पर 20°C से 35°C के तापमान में सबसे अच्छा काम करती हैं। जब चिलचिलाती धूप में गाड़ी को फास्ट चार्ज किया जाता है या लगातार तेज चलाया जाता है, तो बैटरी का तापमान खतरनाक स्तर तक पहुँच जाता है।

4. अनधिकृत चार्जर और बिजली का उतार-चढ़ाव (Power Spikes)

सस्ते, लोकल या गैर-प्रमाणित चार्जर का उपयोग करना बहुत खतरनाक होता है। ये चार्जर सही वोल्टेज और करंट नियंत्रित नहीं कर पाते। इसके अलावा, चार्जिंग पॉइंट की वायरिंग में अर्थिंग (Earthing) न होना भी शॉर्ट सर्किट का कारण बनता है।

5. फिजिकल डैमेज (सड़क के गड्ढे या दुर्घटना)

भारत की सड़कों पर गहरे गड्ढे और ऊंचे स्पीड ब्रेकर्स आम हैं। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और कारों में बैटरी आमतौर पर गाड़ी के निचले हिस्से (Floorboard/Chassis) में लगी होती है। नीचे से तेज झटका लगने पर बैटरी पैक में दरार आ सकती है या अंदरूनी सेल्स पिचक सकते हैं, जो बाद में आग का रूप ले लेते हैं।


EV आग से बचाव के लिए जरूरी सुरक्षा नियम (Safety Tips)

थोड़ी सी सावधानी बरतकर आप अपनी इलेक्ट्रिक गाड़ी को पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं:

1. हमेशा ओरिजिनल चार्जर का ही उपयोग करें

कंपनी द्वारा दिए गए अधिकृत (OEM) चार्जर का ही इस्तेमाल करें। किसी अन्य गाड़ी या सस्ते लोकल चार्जर से अपनी EV कभी चार्ज न करें।

2. राइड के तुरंत बाद चार्जिंग पर न लगाएं

लंबी दूरी तय करने के तुरंत बाद या तेज धूप में गाड़ी चलाने के बाद बैटरी काफी गर्म होती है। गाड़ी को कम से कम 30 से 45 मिनट ठंडा होने दें, उसके बाद ही चार्जिंग प्लग लगाएं।

3. सीधी धूप और बंद जगह में चार्जिंग से बचें

गाड़ी को कभी भी सीधी, चिलचिलाती धूप में चार्ज न करें। चार्जिंग हमेशा किसी हवादार (Ventilated) और छांव वाली जगह पर करें। रिहायशी कमरे या एग्जिट गेट के ठीक सामने टू-व्हीलर चार्ज करने से बचें।

4. रातभर चार्जिंग पर लगाकर न छोड़ें (Avoid Overnight Charging)

हालाँकि आधुनिक BMS ऑटो-कट की सुविधा देते हैं, फिर भी किसी तकनीकी खराबी से बचने के लिए बैटरी 100% फुल होते ही चार्जर बंद कर दें। रातभर गाड़ी को अनअटेंडेड (बिना निगरानी) प्लग-इन न छोड़ें।

5. आफ्टरमार्केट मॉडिफिकेशन (छोड़छाड़) न कराएं

गाड़ी में अतिरिक्त हॉर्न, फैंसी लाइट्स या जीपीएस लगाने के लिए लोकल मैकेनिक से मूल वायरिंग कटवाने (Wire Splicing) की गलती न करें। यह शॉर्ट सर्किट का सबसे बड़ा कारण बनता है।


चेतावनी के संकेत: आपात स्थिति में क्या करें?

यदि आपको अपनी EV से:

  • कोई अजीब जलने की गंध (Burning Smell) आए,
  • बैटरी के पास से असामान्य गर्मी या सीटी जैसी आवाज सुनाई दे,
  • या हल्का सफेद/ग्रे धुआं निकलता दिखे,

तो तुरंत ये कदम उठाएं:

  1. गाड़ी को तुरंत रोकें, स्विच ऑफ करें और उससे कम से कम 30-50 फीट दूर हो जाएं।
  2. बैटरी पर पानी डालने की गलती न करें (जब तक कि बहुत भारी मात्रा में पानी उपलब्ध न हो)।
  3. तुरंत फायर ब्रिगेड (101) को कॉल करें और उन्हें बताएं कि यह एक ‘लिथियम-आयन बैटरी’ की आग है।

निष्कर्ष (Conclusion)

इलेक्ट्रिक वाहन भविष्य की जरूरत हैं और वे पेट्रोल गाड़ियों की तुलना में कहीं अधिक किफायती हैं। भारत सरकार ने भी अब बैटरी सुरक्षा के लिए सख्त मानक (AIS 156 और AIS 038 Phase 2) अनिवार्य कर दिए हैं, जिससे नई गाड़ियाँ पहले से कहीं अधिक सुरक्षित बनकर आ रही हैं।

हालाँकि, एक यूजर के तौर पर हमारी भी जिम्मेदारी है कि हम बैटरी को एक संवेदनशील ऊर्जा स्रोत समझें और चार्जिंग व रखरखाव से जुड़े बुनियादी नियमों का पालन करें। सही जानकारी और थोड़ी सी सावधानी ही इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को सुरक्षित और आनंददायक बना सकती है।

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